तो बात यु है कि, वो जो लड़की हैं न, वो जो हमेशा, हरदम मेरे ख्वाबों में छायी रहती है, वो मुझसे खफा है |   कहती है तुम मुझसे, आज-तक, कभी मिले ही नहीं | यही, कुछ शहर छोड़ कर है उसका शहर और यु नहीं कि मैं उसके शहर गया और उससे मिले बगैर आ गया, पर यु भी नहीं कि मैं इतने वक़्त में कभी जा नहीं सकता था | बस, मुझे किसी चीज़ का इंतज़ार है | नहीं पता किसका|

या शायद मुझे डर है कि मुझसे मिल कर वो मुझसे फिर कभी न मिलने का न सोच ले | या शायद यह डर है की जब मेरी आँखे उसकी आँखो पर रुकेगी, तब उसकी आँखे मेरी आँखों में वो न पढ़ ले जो अब तक मेरी उँगलियाँ उससे कहने से डरती आयी है |

क्युकी बात यु है कि वो बस सच कहती है, और सच ने काफी दिल तोड़े है | और अबके अगर मेरा दिल टुटा, तो शायद मैं भी टूट जाऊंगा |

पर शायद – शायद ! शायद यु भी हो सकता है कि वो आये और आकर किसी बहाने से मेरी कलाई थाम ले | या शायद जब वो मुझे अपना शहर घुमा रही हो, तब मैं उसकी कलाई अपनी कलाई में थाम लूँ | या जब तेज़ हवा में उसकी ज़ुल्फ़ें उड़े, तब मैं उन्हें थाम कर उसके कान के पीछे संभल कर रखने में उसकी मदद कर दूँ | या उसके सममित काजल को मैं अनजाने में उतनी तवज़्ज़ो दे दूँ जितनी की मैं अपने ख्यालों में देता हूँ |

होने को तो यु भी हो सकता है की वो आये और जब वापस अपने रास्तो पर लौट जाने का समय आये, तो वो ज़रा ठहर कर, थोड़ा हिचक कर कहे, ‘सुनो ना, यहाँ तक आने में तुमने इतने साल लगा दिए, अब यहीं रुक जाओ ना |’

पर फिलहाल बात यु है कि वो अभी मुझसे खफा है |

Image ©abhiandnow

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