सब अक्सर हमसे कहते है कि हम पुराने ज़माने के है, पीछे के पीछे ही रह गए | बात इतनी है कि हमे इश्क़ कि आरज़ूओं से खेलना पसंद नहीं है |

बात इतनी है कि हम सबकी टेड़ी हरकतें नज़रअंदाज़ कर देते है | और सब यह सोच कर खुश होते है कि हमे कुछ सुध ही नहीं |

बात इतनी है कि हम बस अपने खास से ही अपने राज़ और किस्से कहते है | और बाकी सब इस सोच में परेशान है कि हम इतने शर्मीले क्यों है |

बात इतनी है कि हम भरोसा सब पर करते है | पर इस मामले में हम दूसरा मौका किसी को नहीं देते |

सब पूछते है हमसे, ‘तुमने आखिर किया ही क्या है मेरे लिए?’ बात इतनी है कि और करके जता देते है, और अपने करके भुला देते है |

और उन्हें इस बात पर बड़ा गुमान है कि पूरा शहर उन्हें पहचानता है | बात इतनी है कि हमारे चाहने वाले कम ज़रूर है, पर सब जान छिड़कते है हम पर |

बात इतनी है कि हमे सच से कुछ ज़्यादा हे लगाव है | पर न जाने कैसे हम उनकी नज़रों में घमंडी बन गए है |

बात इतनी है कि कुछ लोगों को अपनी मातृ भाषा ज़्यादा पसंद होती है | हमे भी है | और वो वहाँ बैठें इस मुगालते में ठहाका मार रहे है कि हमे अंग्रेजी आती ही नहीं |

जीने के सबके अपने उसूल होते है | बात इतनी है कि हमारे उसूल उनके उसूलों से थोड़े कुछ अलग है |

बात इतनी है, इसलिय ही शायद समझने में वक़्त लगता है |

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